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    श्रेष्ठी बिशनस्वरुप - एक परिचय

 

जिनके पूर्वजो ने सत्संस्कार दिये हों उन्हें प्रतिष्ठा मिलनी

अवश्यंभावी कहते है कि


नाव बाड़े पानी घर मे बाड़े दाम

दोनो हाथ ऊलीचिये ये स्यानो के काम


बीसवीं सदी में सेठ प्यारेलाल हस्तसाल ग्राम मे रहते थे जो

आज दिल्ली में उत्तम नगर नाम से प्रसिद्ध है के आस पास

के 82 ग्रामो के प्रमुख रहे है। उस काल में वे दरिद्र नारायण

की भरपूर सेवा करते थे ।वे गरीबो को खुले हाथो से दूध व

अनाज बाँटते थे वे शत् हस्तं समाकिर, सहस्र हस्तं विकिर

का अनुकरण करते हुए उन्होने दो हाथो से कमाया और सौ

हाथो से बाँटा।

 

उनके तीन पुत्र हुए उनमे से दो उन्ही के पदचिन्हों  पर चलें

तीसरे मात्र ढाई वर्ष की अल्पायु के थे तब बड़े पुत्र सेठ

पूर्णचन्द की प्रतिष्ठा दूर-दूर तक फैली। इसी प्रतिष्ठा से ईर्ष्या

होनी भी स्वाभाविक थी। धोखे से एक बार डकैतो ने उनकी

कोठी पर हमला बोल दिया। जिसमे सेठ पूर्णचन्द को मृत्यु

का वरण करना पड़ा। ढाई वर्ष के श्री बृजलाल को साथ लेकर

उनके बड़े भाई सेठ शिवलाल बहादुरगढ आ बसे,जो आज

बहादुर गढ में बसे हुए है। सेठ बृजलाल बड़े हुए तो उनका

विवाह श्रीमती नारायणी देवी जिनकी कोख से बिशनस्वरुप

नामक बालक ने 23-02-1957 मे जन्म लिया।

 

श्री लक्ष्मीनारायण अपने छोटे भाई श्री बिशन स्वरुप जी के

साथ भिवानी आ बसे। और भिवानी आकर श्री बिशन स्वरुप

स्वतंत्र व्यापार करने लगे। व्यापार में शुचिता बनाये रखना

उनका परम धरम रहा। इसी के कारण श्री बिशन स्वरुप

निरन्तर दस वर्ष अनाज मण्डी के प्रधान रहे। व्यापार के

साथ-साथ उन्हे समाज सेवा की सत्प्रवृत्ति भी रही उन्होने

अपने अल्प जीवन काल में समाज मे जो स्थान बनाया व

अतुल्य है। शिक्षा दर्पण ट्र्स्ट, महाराज अग्रसैन जयन्ती, खाटू

श्याम प्रेम मण्डल के आप प्रधान रहे। विद्याप्रचार हेतु जनसेवा

ट्र्स्ट बना कर अपने प्रयासों से सरकार से जमीन प्राप्त की

तथा एक विशाल विद्यालय खोला इसके अतिरिक्त अनाज

मण्डी भिवानी मे एक भव्य मन्दिर व धर्मशाला बनाने मे

आपका अद्वितीय योगदान रहा भिवानी का सूर्या बैंक्वट

आपकी ओर से भिवानीवासियों को अपूर्व देन है। मार्डन गम

एण्ड केमिकल्स के माध्यम से आपने सौ परिवारो को

आजीविका दी । परन्तु परमात्मा को कुछ और ही स्वीकार

था, उनकी परमात्मा को आवश्यकता थी और दिनांक 6

सितम्बर 2003 को उन्हे अपने पास बुला लिया। आज उनके

सुपुत्र चि॰ गणेश, चि॰ अनुज व चि॰ राजरतन तीनो अपनी

माता श्रीमती शारदा देवी के संरक्षण में अपनी पिता की

प्रतिष्ठा को कई गुणा बढा रहे है। व्यापार में शुचिता बनाए

रखकर वर्ष भर में 25-30 लाख अमेरिकी डालर के रुप में

विदेशी मुद्रा राष्ट्र को देते है ।

 

अपने पिता जी श्री बिशन स्वरुप के जन्म दिवस पर 23

फरवरी को प्रतिवर्ष एक साहित्यिक अनुष्ठान का शिवसंकल्प

लिया है । इसके लिये उन्होने सांस्कृतिक मंच के माध्यम से

श्रेष्ठी बिशनस्वरुप स्मृति व्याख्यान प्रतिवर्ष आयोजित करने

की व्यवस्था की है।                

 

   
   
   
   
   
   
 
     
 
                 
 

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